सफलता की कुंजी, मैं खुद हासिल करूंगा, अपने ब्लॉग के जरिए ,
सफलता शब्द की परिभाषा, - सफलता का मतलब है, महत्वपूर्णता, इज़्ज़त पाना, सम्मान पाना, प्रसंशा का पात्र बनना और लोगो बीच खुद को एक बेहतर इंसान के रूप में महसूस करना। सफलता का मतलब है आत्म-सम्मान, जिंदगी का असली सुख और जीवन में संतुष्टि, अपने परिवार, रिस्तेदार, पड़ोसी और ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए कुछ करने की क्षमता
सफलता आपका परिचय दुनिया से कराती अगर आपके पास, पैसा है तो दुनिया आपके कदमों में गिर कर और यहां तक की लोग आपके पीछे, पीछे रहेगें और अगर आपके पास पैसे नहीं है तो दुनिया आपको फिर कर भी नहीं देखेगी इसी को कहते हैं सफलता की सबसे बड़ी कुंजी सफलता अगर आपके पास है तो दुनिया आपके कदमों में गिर कर बात करेगी अगर आपके पास सफलता ही नहीं है और पैसे ही नहीं है तो दुनिया आपको पूछेगी भी नहीं कि आखिर आपने कुछ खाया है कि नहीं खाया आपने कुछ किया है कि नहीं किया दोस्तों पैसों की आजकल ज्यादा वैल्यू है यहां तक कि पैसे सबसे बड़ी कीमती चीज हो चुकी है नेताओं के तलवे चाटने वाले जो गुरूर प्रत्याशी हैं यह पैसे के पीछे पता नहीं कितनों की जान उड़ा देते हैं पैसा इस दुनिया में सबसे ज्यादा मूल्यवान हो चुका है तो दोस्तों इसी के चलते सफलता की कुंजी को आप लोग मेरी ब्लॉगिंग का नया स्टेटस मानकर जितना हो सके उतना शेयर कीजिए और दुनिया को बताइए कि आज के दिन में सबसे ज्यादा कलयुग के इस दिन में पैसों की क्या वैल्यू है दोस्तों पैसे सबसे ज्यादा चलने वाली चीज है आजकल पैसो के पैर लग चुके हैं देखा जाए तो दुनिया की सभी जगहों पर पैसे कमाने वालों की ज्यादा वैल्यू है और जो बेचारे गरीब हैं उनकी कोई वैल्यू नहीं है तो आइए चलते हैं दोस्तों और भी अच्छी अच्छी जानकारी को देखकर आपके साथ शेयर करना मेरे लिए सबसे अच्छा गर्व की बात है आइए आगे जानते हैं
की इंसान इंसान को नहीं पसंद करता ऐसे की तरफ ज्यादा उनकी लत बढ़ती है ऐसा उनके लिए सबसे बड़ी स्थिति बन चुका है
पूरे भारत देश यहां तक कि पूरे भारत देश ही नहीं पूरे विश्व में पैसे की सबसे ज्यादा वैल्यू है पैसा एक ऐसा मूल्यवान स्थान बन चुका है कि पैसे के विषय में सोचना लोगों को बहुत ही कठिनाई का दौर झेलना पड़ा है पैसे की वजह से कितने लोगों की गरीबी में परेशानी आई है पैसा एक मूल्यवान स्थिति है दोस्तों इस कलयुग की दुनिया में पैसा हर गरीब की एक पहचान है अगर पैसा है तो गरीब की पहचान है पैसा नहीं है तो कोई पहचान नहीं है इसी के चलते इस सफलता की कुंजी में आप लोग भी भाग लीजिए और जहां तक हो सके वहां तक इस ब्लॉग पोस्ट को पहुंच आइए रीवा वाला सौरव
'- छूकर पहचान सकते हैं दृष्टिबाधित व्यक्ति 500 रुपये के नोट में अशोक स्तम्भ के प्रतीक, महात्मा गांधी की तस्वीर, ब्लीड लाइन और पहचान चिन्ह खुरदरे से मुद्रित हैं, जिन्हें दृष्टिबाधित व्यक्ति छूकर महसूस कर सकते हैं.
जिंदगी में जीने का सबसे बड़ा मकसद है रुपया रूपया है मकसद जीने का दुनिया में अगर आए हो तो रुपया कम आना बहुत जरूरी है क्योंकि पैसा आम आदमी की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है पैसे की सबसे मूल स्थिति को केवल वही जान सकता है जो पैसे को अच्छी तरह से परख सकता है दोस्तों पैसा दुनिया में सबसे बड़ी अपनी पहचान बना कर घूम रहा है पैसे ने दुनिया को इतना गुमराह कर दिया है कि आदमी आदमी को नहीं पहचानता है मर्डर हो जाता है पैसा के कारण पता नहीं क्या क्या हो जाता है
पैसे के कारण आदमी को चिड़चिड़ापन आने लगता है पैसे के कारण आदमी का शरीर एकदम बेकार हो जाता है पैसा ऐसा चीज है कि दुनिया में इस पैसे की ही कारण एक-एक के भाई भाई का गला काट लेता है और यहां तक कि यह भी नहीं कि कोर्ट कचहरी से लेकर जमीनी विवाद से लेकर पता नहीं क्या क्या हो जाता है पैसे में आदमी की सबसे बड़ी पहचान बनती है और पैसे के कारण ही आदमी अपने आप को बेघर समझने लगता है और बेकार समझने लगता है पैसा आदमी की सबसे बड़ी जरूरत है
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