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YouTube की धमाकेदार 💥 शुरूआत ( बातें मार्केटिंग की Affiliate marketing program )

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जिला रीवा के रिटायर फौजी की दस्तान ( एक असली हीरो)

  जिला रीवा के रिटायर फौजी की          दस्तान ( एक असली हीरो

नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों में फिर वापस आ गया मेरा नाम सौरव

 कुमार वर्मा है रीवा बाला सौरव के नाम से मुझे दुनिया जानती है

रिटायर आर्मी मैन सूबेदार  स्वर्गीय श्री बसंत लाल वर्मा
इनका जीवन जिला रीवा पुष्पराज नगर में बीता 
इनकी धर्म पत्नी का नाम श्रीमती प्रभा देवी वर्मा 
इनकी चार पुत्री  थी 
जिनके नाम ये रहे
बड़ी पुत्री का नाम  
सावित्री,  अरचना,  अनीता,   सुलोचना 
पुत्र तीन थे

बड़े पुत्र का नाम धीरू
बीरू,  नीरु इत्यादि इतना ही बड़ा परिवार था 
इसके अलावा इन का सबसे बड़ा नाती जिसका नाम सौरव कुमार वर्मा यानी कि मैं रीवा वाला सौरव जो कि मैं इनके ब्लॉगिंग का स्टेटस ऑन करने जा रहा हूं और इनकी फर्स्ट ब्लॉगिंग लिखने जा रहा हूं दोस्तों हो सके तो इतना शेयर कीजिए कि एकदम विस्फोट हो जाए दोस्तों यह मेरे प्रिय नाना श्री मेरे सगे नाना श्री बसंत लाल वर्मा रिटायर फौजी सूबेदार बसंत लाल वर्मा के नाम से जाने जाते थे इन्होंने चीन और पाकिस्तान की लड़ाई में भागीदारी शामिल करके पता नहीं कितनी बड़े-बड़े मेडल जीते थे इनके पास कुल 7 मेडल जो कि इनके प्रतीक  का सबसे बड़ा सम्मान है

मैं इनकी कहानी को इतना आगे तक ले जाना चाहता हूं कि आज तक किसी ने इनके बारे में कुछ नहीं लिखा लेकिन मैं लिखने की कोशिश कर रहा हूं और लिख भी रहा हूं दोस्तों इन के टोटल परिवार के बारे में तो आपको पता ही चल गया है कितने मतलब बच्चे थे इतने बेटे थे इतने बेटियां थी अब उनके परिवार के बारे में आप लोगों को कुछ जानकारी दी जाए दोस्तों इन के चार भाई थे यह खुद बड़े भाई थे जिनका नाम बसंत लाल वर्मा सूबेदार आर्मी ऑफिसर थे और उसके बाद दिनेश लाल वर्मा विनोद कुमार वर्मा सुरेश वर्मा के मुख्य परिवार में इतने सगे भाई थे इनके छोटे भाई जो थे दिनेश कुमार वर्मा पीडब्ल्यूडी में यह छोटी सी नौकरी करते थे वह भी प्राइवेट में थी इसलिए इनके बेटे को जिनका नाम निलेश वर्मा है नौकरी नहीं मिल पाई सरकारी हालांकि देखा जाए तो वह प्राइवेट थे इसलिए कहां से नौकरी मिली और दूसरे भाई का नाम श्री विनोद कुमार वर्मा था इनके कोई औलाद नहीं थी इनकी जो पत्नी थी बहुत ही शीर्ष और बहुत ही महान और श्रेष्ठ दान और गुणवान बहुत ही अच्छी थी उनको मैं प्यारी नानी कहूंगा उनका नाम था शर्मिला वर्मा उनके प्रति मेरा बहुत बड़ा योगदान रहा है छोटी अवस्था में जाता उनके पास तो बड़े ही लाड प्यार से मुझे इज्जत और प्यार देती थी और उसके बाद इन के सबसे छोटे भाई श्री सुरेश वर्मा इनके 3 पुत्र थे इनके बड़े बेटे का नाम दीपू वर्मा था और विपिन और अज्जू इनके छोटे बच्चे थे
इनकी बेटियों का नाम था का नाम शशि वर्मा इनकी बड़ी बेटी थी सुषमा वर्मा इनकी दूसरी नंबर की बेटी थी संगीता और रानी इनक तीसरी और चौथी बेटी थी
इनके परिवार में थोड़ा सा बड़ा परिवार था लेकिन समझदार और शीर्ष वान  परिवार था इनके सुरेश जो चाचाजी थे इनके मतलब बसंत लाल वर्मा के जो बैठे हैं इनके चाचा जो थे सुरेश वर्मा या राज परिवहन बस चलाते थे
और बसंत लाल वर्मा जी के जो छोटे भाई थे विनोद कुमार वर्मा यह हाउसिंग बोर्ड के रीवा में असिस्टेंट मैनेजर थे

              अब आगे बसंत लाल वर्मा 

आर्मी ऑफिसर श्री स्वर्गीय बसंत लाल वर्मा का जीवन बहुत ही योगदान पूर्वक और इनका जीवन बहुत ही अच्छा बीता था

इनके जीवन काल में बहुत बड़ी-बड़ी कष्ट पूर्ण परिस्थितियां आई लेकिन इन्होंने पर इन्होंने परिस्थिति को बहुत ही अच्छी तरह से रखा और समझा और संभाला भी था मेरे प्यारे मित्रों मेरे ब्लॉग के स्टेटस को पढ़कर शेयर करिए और हो सके तो ज्यादा से ज्यादा लाइक कमेंट और शेयर बढ़ाएं दोस्तों इनके जीवन काल का सबसे प्रथम हिस्सा था इनके पुत्रों का इनके पुत्र बहुत ही बीते समय के सबसे बड़े हारे हुए खिलाड़ी लेकिन विचारों की नौकरी ना लगने पर बहुत ही कष्ट का अनुभव व्यतीत करना पड़ा इन लोगों को उनके बड़े पुत्र धीरेंद्र कुमार वर्मा की आर्थिक स्थिति और तबीयत बहुत ही खराब रहती थी हमेशा कहीं मद्रास कहीं अलीगढ़ तो कहीं दिल्ली पता नहीं कहां का है इनका इलाज करवाया गया था इनके फेफड़े और इनके लीवर में बहुत ज्यादा परेशानी थी इनकी आर्थिक परेशानियों के कारण और बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई अचानक 2016 में जब रीवा शहर में बाढ़ पीड़ित में और उनके दूसरे बेटे जो कि कुछ समझदार तो है लेकिन थोड़ा सनकी भी हैं इनका नाम था वीरेंद्र कुमार वर्मा इनकी भी थोड़ा स्थिति सही नहीं थी लेकिन हो गया कैसे भी करके कर गुजर चल जाता था अभी चल भी रहा है उनकी जो विकलांगता पेंशन थोड़ा आंख से कमजोर हैं तो इनकी आज तक विकलांगता की आंख की पेंशन नहीं बन पाई उनकी आर्थिक स्थिति यही थी कि उनकी पेंशन बन जाए तो या अपने से खाने कमाने के लायक तो नहीं है लेकिन टेंशन बन जाए तो उसमें से थोड़ा इनको राहत राशि का योगदान मिल जाएगा कृपया करके इस बात को पेंशन वाली बात को पब्लिक तक ज्यादा पहुंचाया जाए जो इनकी पेंशन आर्थिक स्थिति में मिलने लगे

और इन के सबसे छोटे बेटे जिसका नाम नरेंद्र कुमार नरेंद्र कुमार का जीवन बहुत ही बेकार है उनके जीवन की सबसे बड़ी स्थिति का माहौल जानने के लिए आप लोग खुद ही हमारे ब्लॉग पर कमेंट कर सकते हैं दोस्तों इनके जीवन की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इन्होंने आज तक कभी भी बाहर का माहौल नहीं देखा या अपने घर पर ही रह कर दुनियादारी को जानकर जिंदगी बिता रहे हैं इनकी धर्मपत्नी का नाम है श्री आशा देवी वर्मा जो कि बहुत ही निपुण और सहायक स्वयंसेवक समिति में काम करती हैं यह एक बहुत ही गंभीर बात है कि आर्मी ऑफिसर की बहू ऐसी नौकरी करती हैं कि देखने लायक हैं

अब इनके जीवन में आर्थिक स्थिति में सबसे बड़ी और सबसे बड़ी चुनौती पूर्ण स्थिति में आती है इनकी माता जी की माता जी का नाम प्रभादेवी बर्मा है जो कि मैंने आपको ऊपर लिखकर बताया है उनकी माताजी को कम सुनाई देता है इसी के कारण वह लड़ने झगड़ने लगती हैं इनकी माताजी जोकि बसंत लाल वर्मा के मृत्यु होने के बाद इनको पेंशन धारक बना दिया गया और इन्हें आज के डेट में 10 से ₹12000 पेंशन मिलती है तो इसी के चलते इनका जीवन पेंशन में चल रहा है लेकिन अगर आप लोग श्री वीरेंद्र कुमार वर्मा जी की बातों को समझ जाएंगे तो कृपया करके इनको ₹600 दिलवाने का आग्रह किया जाए और मेरे इस ब्लॉग को भी आगे बढ़ाया जाए और उनकी पेंशन जल्द बन जाए इसलिए मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं इस ब्लॉग के टाइटल को जरूर आगे बढ़ाएं


ऐसे ऑफिसर को मैं तहे दिल से सलाम करता हूं ,


जय हिंद,


आगे भी मेरी ब्लॉग आती रहेंगी इससे और अच्छी अच्छी इसको शेयर करिए कमेंट करिए और हो सके तो लाइक भी करिए शेयर ज्यादा करिए जिससे पब्लिक में इस ब्लॉग का सबसे ज्यादा चयन हो नमस्कार आपका अपना रीवा वाला सौरव




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